Vajrasana aur matsyasan yog Karne ka Tarika aur iske Labh
वज्र का अर्थ होता है कठोर और दूसरा यह कि इंद्र के एक शस्त्र का नाम वज्र था। इससे पैरों की जांघें मजबूत होती है। शरीर में रक्त संचार बढ़ता है। पाचन क्रिया के लिए यह बहुत लाभदायक है।

Vajrasana aur matsyasan yog Karne ka Tarika aur iske Labh

Vajrasana aur matsyasan yog

Vajrasana aur matsyasan yog :- वज्र का अर्थ होता है कठोर और दूसरा यह कि इंद्र के एक शस्त्र का नाम वज्र था। इससे पैरों की जांघें मजबूत होती है। शरीर में रक्त संचार बढ़ता है। पाचन क्रिया के लिए यह बहुत लाभदायक है। भोजन पश्चात इसी आसन में कुछ देर बैठना चाहिए। यह टांगों की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है। घुटनों में दर्द होने की स्थिति में यह आसन न करें।

  1. Chehre ke til se paye minton mein chhutkara, beauty tips
  2. Diet plan for adults, वयस्क को प्रीति दीन कितना आहार लेना चाहिए
  3. tvacha ki khubsurti Pai bahut kam samay mein beauty tips
  4. Ghar ka bana ghee roj khaye thand ke dinon me,jane fayde
  5. body tone aur fit rakhne ke liye ye roj Aerobics karen
  6. Guru Nanak Dev ji history or upadesh, गुरु नानक देव जी
  7. TB Rog ke lakshan aur ilaj, symptoms and remedies टीबी रोग
  8. Vitamins Jo rakhenge aapke Bal swasth
  9. Surya namaskar aasan ki 12 sthitiyaan
  10. Pranayam ke fayde jane, प्राणायाम के फायदे
  11. Yog mudra ki vidhi aur Labh ke bare mein janna
  12. Sinus home remedies, साइनस के 10 घरेलू इलाज
  13. Yog ka sampurn gyan, Jane iske niyam or kriya
  14. Thin cheeks tips, पिचके पतले गालों को मोटा कैसे करें, 10 आसान उपाय
  15. Yog ka sampurn gyan, Jane iske niyam or kriya

सावधानी वज्रासन

घुटनों में दर्द होने की स्थिति में यह आसन न करें।

इसके लाभ :-इस आसन से शरीर मजबूत और स्थिर बनता है। इससे रीढ़ की हड्डी और कंधे सीधे होते हैं। इससे शरीर में रक्त-संचार समरस होता है और इस प्रकार शिरा के रक्त को धमनी के रक्त में बदलने का रोग नहीं हो पाता। यही एकमात्र ऐसा आसन है जिसे आप खाना खाकर भी कर सकते हैं। इससे भोजन आसानी से पचता है। यह टांगों की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है।

शरीर को सुडौल बनाए रखता है। Vajrasana aur matsyasan yog

शरीर को सुडौल बनाए रखता है। उच्च रक्तचाप कम होता है। वजन कम करने में मददगार है। अपच, गैस, कब्ज इत्यादि विकारों को दूर करता है। महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता दूर होती है। रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। पाचन शक्ति बढ़ाता है और प्रजनन प्रणाली को सशक्त बनाता है। इस आसन में धीरे-धीरे लंबी और गहरी सांस लेने से फेफड़े मजबूत होते हैं।

matsyasan yog

मत्स्य का अर्थ है– मछली। इस आसन में शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, अत: यह मत्स्यासन कहलाता है। यह आसन छाती को चौड़ा कर उसे स्वस्थ बनाए रखने में सक्षम है।

सावधानी Vajrasana aur matsyasan yog

छाती व गले में अत्यधिक दर्द या अन्य कोई रोग होने की स्थिति में यह आसन न करें। बड़ी सावधानी से यह आसन करना चाहिए, शीघ्रता से गर्दन में मोच आ जाने का भय रहता है, क्योंकि धड़ को बिल्कुल ऊपर कर देना होता है। यह आसन एक मिनट से दो मिनट तक किया जा सकता है।

Vajrasana aur matsyasan yog के लाभ

इसके लाभ:- इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। गला साफ रहता है तथा छाती और पेट के रोग दूर होते हैं। रक्ताभिसरण की गति बढ़ती है, जिससे चर्म रोग नहीं होता। दमे के रोगियों को इससे लाभ मिलता है। पेट की चर्बी घटती है। खांसी दूर होती है।

Rajji Nagarkoti

My name is Abhijeet Nagarkoti . I am 31 years old. I am from dehradun, uttrakhand india . I study mechanical. I can speak three languages, Hindi, Nepali, and English. I like to write blogs and article

This Post Has 26 Comments

  1. definitely impress [url=http://cialisles.com/#]buy cialis generic[/url] somewhat response more debate cialis without dr prescription tonight newspaper buy cialis generic mainly
    produce http://www.cialisles.com/

  2. Dimas

    Thanks a lot for the post.Really thank you! Much obliged.

Leave a Reply